उर्जा की आवृत्ति एवं कंपन्न के खोज का श्रेय हमारे महान ऋषियों व् तपस्विओ को जाता है जिन्होंने अपने दिव्या ज्ञान से ब्रम्हांड के रहस्यों का विस्तार पहले ही कर दिया था सम्पूर्ण जगत में जीवन ज्योति का चन्द्र के सहयोग से विस्तार करने वाले ग्रह राज सूर्य प्रत्यक्ष देव के रूप में प्रतिपल गतिशील है जो प्रकृति के नियामक और नियंता है प्राकृतिक आपदाए संतुलन का प्रतिक है किन्तु विपदाए मानव जनित हो तो निर्माण की प्रक्रिया ही विध्वंश का कारण बन जाती है वहां दैविक कोप को निमंत्रण देने की आवश्यकता नहीं पड़ती वर्तमान समय इसी विषमताओ के दौर से गुजर रहा है आज २६२ वर्षो के उपरांत" क्रौधी "नाम संवत्सर का आगमन हुआ है जो ८४ योजन आकाश और ८४ योजन पाताल का वो मापदंड है जो ब्रम्हा की क्रोधाग्नि से उत्पन्न होकर स्वयं नियति और नियंता बन कर हमारे समक्ष प्रकट हुआ है
इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सोमवार दिनांक ०४-०४-२०११ में "क्रोधी "नामक संवत्सर का प्रारंभ हो रहा है वर्ष प्रवेश तुला लग्न में होने जा रहा है ६ ग्रहणों के अनिष्टकारी परिणाम लिए वर्ष का राजा चन्द्रमा पाप ग्रहों के आधिपत्य में वर्ष का संचालन कर रहा है चन्द्रमा महिलाओ के शासन का प्रतीक है किन्तु शत्रु क्षेत्री होने के कारण शासक -प्रशासक की पकड़ स्थानीय क्षेत्र प्रदेश -देश में कमजोर होगी प्रजावर्ग में परस्पर द्वेष ,लोभ और क्रोध की बाहुलता समान्य जीवन को हताहत करेगा भूकंप .चक्रवाती तूफ़ान अग्निकांड ,दुर्घटनाये घटित होगी अग्नि त्रिकोण में ग्रहण पड़ने के कारण सत्ता के स्वामियो के लिए यह वर्ष अमंगलकारी है जनता में असंतोष ,धनधान्य के उत्पादनों में कमी किटजनित रोगों की उत्पत्ति व्यय का कारक बनेगी प्रशासको -शासको एवं राजनेताओ का जीवन षड़यंत्र की विशात पर होगा न्यायपालिका और कार्यपालिका में परस्पर विरोध उत्पन्न होगे राजनैतिक असंतोष बना रहेगा
शनि और मंगल का भौमिक भ्रमण धार्मिक आडम्बरो में वृद्धि करेगा स्थानीय एवं जिले के लिए संसाधनों की कमी रोष का कारण बनेगी
मध्यप्रदेश से अलग हुए राज्य छत्तीसगढ़ का उद्भव सिंह लग्न में हुआ है लग्नेश सूर्य शत्रुभाव में होने के कारण राज्य की समान्य प्रशासनिक व्यवस्था में कमी एवं गुप्त षड्यंत्र व् मंत्रणा के प्रभाव से पक्ष व विपक्ष पार्टियों द्वारा सरकार के अस्तित्व को खतरा बना रहेगा सत्तापक्ष के राजनेता अपने पुरुषार्थ से प्रदेश प्रदेश की संचार व्यवस्था ,वाणिज्य खनिज व् अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से आय के स्त्रोतों में वृद्धि करने का भरसक प्रयाश करेगे किन्तु मंहगाई अपने चरम सीमा में होगी सुरक्षा व्यवस्था में अत्यधिक व्यय होगा नक्सलवाद ,आतंकवाद और उग्रवाद में वृद्धि होंगी
स्वतन्त्र भारत का अभ्युदय वृषभ लग्न में होने के कारण भारत अपने निज बाहू बल से बिना अन्य राष्ट्रों का सहयोग से अपनी प्रगति एवं गौरव को ऊँचा रखने में समर्थ होगा किन्तु देश की आंतरिक गतिविधिया केन्द्रीय शासन को संकटकालीन स्थिति में पंहुचा सकती है किसी राजनेता की हत्या या मृत्यु राजनैतिक पृष्टभूमि में खलबली मचा सकती है राष्ट्रीय प्रतियोगिताओ में भारत सफल रहेगा सूर्य और शनि के आसन्न केंद्र योग ,मानवीय एवं प्राकृतिक आपदाओ के साथ नेतृत्व और नियंत्रण में क्षमता के आभाव में संवत्सर के अंत तक प्रभावशाली रहेगे